Hindi Write-ups

आम आदमी

वह आदमी आम है।

चूसो उसे

कर्ज की दहकती अग्नि में
तापो सर्द में
ठूसो उसे

और समझाओ
हमारी संस्कृति का अर्थ
बताने आएगा कभी
रूसो उसे

वह महान् भारत का
दीन घुटता किसान है
मूसो उसे
चूसो उसे
वह आदमी आम है।

Line by:- Shailendra Kumar Singh

Platform:- SPLIT POETRY INDIA

Editor:- Gautam Jha


बोझ

मैं

जीवन ढोता गधा-सा
मेरी कमर तोड़े दे रहा
भारी बोझ पीठ का ।

साहस कम
भय अगम
मुझे कदम-कदम
आगे बढ़ाए जा रहा
और
चाबुक धोबी का
मुझे खाए जा रहा।

Line by:- Shailendra Kumar Singh

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Editor:- Gautam Jha


अच्छे लगते हैं

अच्छे लगते हैं
माटी सने पाँव
उस आदमी के होंगे
जो अभी भी किसी जमीन से जुड़ा है

अच्छे लगते हैं
छालों भरे पाँव
मन कहता है
उस आदमी के होंगे जो
माँ की गोद से उतरकर
दूसरों के कंधों पर नहीं
पाँव-पाँव चला है

अच्छा लगता है।
उसका चिथड़ों ढका जीवन
विश्वास होता है
उसने कभी किसी को ठगा नहीं है
प्रमाण है इस बात का
वह आदमी जीवन-संघर्ष छोड़ भगा नहीं है।

Line by:- Shailendra Kumar Singh

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Editor:- Gautam Jha


मेरी कविता

आप मुझे
मेरी कविता की तरह देख सकते हैं
बावजूद इसके
मैं कविता नहीं हूँ
संभव नहीं देखना
कविता को शब्दों में
और न ही होती है
कविता की कोई किताब
कविता तो
अपने भीतर भरे अर्थों में रहती है
जो शब्द-किनारों बीच
धारवार बहती है…

Line by:- Shailendra Kumar Singh

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Editor:- Gautam Jha